आतंकवाद पर दुनिया अब हमारे साथ : प्रधानमंत्री

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आतंकवाद आज विश्व के हर भू-भाग में और एक प्रकार से प्रतिदिन होने वाली घटना का एक अति-भयंकर रूप बन गई है. भारत गत 40 वर्ष से आतंकवाद के कारण बहुत कुछ झेल रहा है. हज़ारों निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवाई है, कुछ वर्ष पहले,भारत जब दुनिया के सामने आतंकवाद की चर्चा करता था, आतंकवाद से भयंकर संकट की चर्चा करता था तो दुनिया के बहुत सारे लोग इसको गंभीरता से लेने के लिए तैयार नहीं थे. आज जब आतंकवाद उनके अपने दरवाज़ों पर दस्तक दे रहा है तब दुनिया की हर सरकार मानवतावाद में विश्वास करने और लोकतंत्र में भरोसा करने वाली सरकारें आतंकवाद को एक बहुत बड़ी चुनौती के रूप में देख रहे हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 38वीं बार रेडियो पर मन की बात के जरिए संविधान दिवस, नौसेना दिवस, विश्व मृदा दिवस समेत और स्वच्छता विषय पर देश को संबोधित किया. प्रधानमंत्री ने 26/11 हमले के शहीदों को याद किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी. प्रधानमंत्री ने कहा कि आज पूरा विश्व आतंकवाद से जूझ रहा है. उन्होंने आंतवाद के खिलाफ दुनिया के एकजुट होने का आवाहन किया.
प्रधानमंत्री ने कहा कि ये देश कैसे भूल सकता हैं कि नौ साल पहले 26/11 को आतंकवादियों ने मुंबई पर हमला बोल दिया था. देश उन बहादुर नागरिकों, पुलिसकर्मी, सुरक्षाकर्मियों को नमन करता है जिन्होंने इस हमले में अपनी जान गंवाई. यह देश कभी उनके बलिदान को नहीं भूल सकता.

प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद ने विश्व की मानवता को ललकारा है. आतंकवाद ने मानवतावाद को चुनौती दी है. वो मानवीय शक्तियों को नष्ट करने पर तुला हुआ है. इसलिए, सिर्फ़ भारत ही नहीं, विश्व की सभी मानवतावादी शक्तियों को एकजुट होकर आतंकवाद को पराजित करके ही रहना होगा. भगवान बुद्ध, भगवान महावीर, गुरु नानक, महात्मा गांधी, ये ही तो ये धरती है जिसने अहिंसा और प्रेम का संदेश दुनिया को दिया है. आतंकवाद और उग्रवाद, हमारी सामाजिक संरचना को कमज़ोर कर, उन्हें छिन्न-भिन्न करने का नापाक प्रयास करते हैं. इसलिए, मानवतावादी शक्तियों का अधिक जागरूक होना समय की मांग है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज संविधान दिवस है, 1949 में आज ही के दिन संविधान-सभा ने भारत के संविधान को स्वीकार किया था. 26 जनवरी 1950 को, संविधान लागू हुआ था. भारत का संविधान, हमारे लोकतंत्र की आत्मा है. आज का दिन, संविधान-सभा के सदस्यों के स्मरण करने का दिन है. उन्होंने भारत का संविधान बनाने के लिए लगभग तीन वर्षों तक परिश्रम किया. संविधान-दिवस के अवसर पर डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर की याद आना तो स्वाभाविक है, आज हम भारत के जिस संविधान पर गौरव का अनुभव करते हैं, उसके निर्माण में बाबासाहेब आंबेडकर के कुशल नेतृत्व की अमिट छाप है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि चार दिसंबर को हम सब नौसेना दिवस दिवस मनाएंगें. भारतीय नौ-सेना, हमारे समुद्र-तटों की रक्षा और सुरक्षा प्रदान करती है. मैं, नौ-सेना से जुड़े सभी लोगों का अभिनंदन करता हूँ. जब हम नौ-सेना की बात करते हैं तो सिर्फ हमें युद्ध ही नज़र आता है लेकिन भारत की नौ-सेना, मानवता के काम में भी उतनी ही बढ़-चढ़ कर के आगे आई है.

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