प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत जी20 के नेताओं ने आतंकवाद की वैश्विक समस्या से निपटने के लिए संयुक्त प्रयास करने और उसे वित्तिय मदद देने वाले स्रोतों पर नकेल कसने का संकल्प लेते हुए कहा कि दुनिया से हर हिस्से से आतंकियों की सभी पनाहगाह नष्ट किए जाने चाहिए.
जी20 शिखर सम्मेलन के पहले दिन आतंकवाद से निपटने पर 21 बिंदुओं वाले संयुक्त घोषणा पत्र में आपराधिक न्याय संबंधी कार्रवाई, एहतियातन कदम उठाने एवं संचालनात्मक सूचना साझा करने को लेकर खुफिया, कानून प्रवर्तन एवं न्यायिक प्राधिकारियों के बीच सूचना का तेज एवं लक्षित आदान प्रदान करने का संकल्प लिया गया.
जी20 नेताओं ने आतंकवादी गतिविधियों के लिए वित्तिय मदद को रोकने के लिए अपना संकल्प दोहराया कि वे संपूर्ण अंतरराष्ट्रीय वित्तिय प्रणाली को आतंकवादियों को वित्तिय मदद देने के प्रतिकूल बनाएंगे और निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम करने समेत सूचना के आदान प्रदान को बढ़ाएंगे.
जी20 ने इंटरनेट और सोशल मीडिया का दुरपयोग करके आतंकी गतिविधियों के लिए फंड एकत्र करने, लोगों की भर्ती करने और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाए जाने की अपील की. उन्होंने निजी क्षेत्र के संचार सेवा प्रदाताओं से भी वेब से घृणा फैलाने वाली सामग्री हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी20 शिखर सम्मेलन में उन देशों के खिलाफ ठोस कारवाई की मांग की जो अपने राजनीतिक हितों के लिए आतंकवाद का समर्थन करते हैं. उन्होंने आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों के अधिकारियों के जी20 देशों में प्रवेश पर रोक लगाने की भी वकालत की.


जर्मन शहर में शिखर सम्मलेन हिंसक प्रदर्शनों के बीच शुरू हुआ. जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल ने विवादास्पद मुद्दों पर कोई सर्वसम्मति नहीं बन पाने की स्थिति में समझौता करने का भी प्रस्ताव रखा. जबकि भारत उन अधिकतर देशों के साथ रहा जिन्होंने ग्लोबल वार्मिग, संरक्षणवाद एवं आतंकवाद को मदद करने वालों के खिलाफ लड़ाई में निर्णायक कदम उठाने की मांग की.
जी20 देशों के नेताओं ने आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं के समाधान एवं मुक्त व्यापार जैसे मामलों पर विचार विमर्श किया. नेताओं ने इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथ के प्रसार को रोकने और आतंकवादियों की पनाहगाहों के खिलाफ कार्वाई करने का संकल्प लिया. घोषणापत्र में कई उन मामलों का जिक्र किया गया, जिसे मोदी ने सुबह शुरूआत में नेताओं के र्रिटीट के दौरान उठाए थे.
सिक्किम क्षेत्र में भारत और चीन की सेनाओं के बीच चल रहे गतिरोध के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने ब्रिक्स नेताओं की अनौपचारिक बैठक के दौरान एक दूसरे से हाथ मिलाया और चर्चा की. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने बताया है कि मोदी और शी ने व्यापक मुद्दों पर चर्चा की है.
प्रवक्ता ने ट्वीट किया कि हैमबर्ग में चीन की मेजबानी में हुई ब्रिक्स नेताओं की अनौपचारिक बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी ने व्यापक मुद्दों पर बातचीत की.’ हालांकि बागले ने बातचीत से जुड़े मुद्दों के बारे में ब्यौरा नहीं दिया. विदेश मंत्रालय ने मोदी और शी की हाथ मिलाते हुए तस्वीर भी ट्वीट की.

मोदी ने चीन की अध्यक्षता में ब्रिक्स समूह में गतिशीलता की तारीफ की है. मोदी ने बीजिंग की मेजबानी में होने जा रहे ब्रिक्स के आगामी शिखर सम्मेलन के लिए पूर्ण समर्थन देने की भी बात कही. मोदी के ठीक बाद अपने संबोधन में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भी भारत की अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स के तेजी से आगे बढ़ने की तारीफ की. भारत की अध्यक्षता की अवधि पूरी होने के बाद चीन को ब्रिक्स की अध्यक्षता सौंपी गई है.
मोदी ने कहा कि जी-20 को आतंकवाद को पैसे मुहैया कराने, फ्रेंचाइजी, सुरक्षित ठिकाना मुहैया कराने, समर्थन करने और प्रायोजित करने का सामूहिक तौर पर विरोध करना चाहिए.’ प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद का नाम लेते हुए पाकिस्तान पर निशाना साधा और कहा कि कुछ देश राजनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आतंकवाद का एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते हैं. मोदी ने लश्कर और जैश की तुलना ISIS और अलकायदा से करते हुए कहा कि इनके नाम भले ही अलग हों, लेकिन इनकी विचारधारा एक है.
पीएम ने 11 सूत्री कार्य एजेंडा पेश किया जिसमें जी-20 देशों के बीच आतंकवादियों की सूचियों के आदान-प्रदान, प्रत्यर्पण जैसी कानूनी प्रक्रियाओं को आसान बनाने एवं गति देने और आंकवादियों को धन एवं हथियारों की आपूर्त पर अंकुश लगाने के लिए ठोस कदम उठाने के सुझाव शामिल हैं.
मोदी ने पाकिस्तान की ओर साफ इशारा करते हुए कहा कि कुछ देश आतंकवाद का इस्तेमाल राजनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कर रहे हैं. आतंकवाद के प्रति अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं के कमजोर होने पर अफसोस जताते हुए मोदी ने कहा कि इस समस्या से निपटने में देशों का नेटवर्क कम है, जबकि आतंकवादियों का नेटवर्क बेहतर है.
मोदी ने जी-20 शिखर बैठक से इतर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, ब्रिटिश प्रधानमंत्री टेरीजा मे, जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल और फ्रांसीसी राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों, ब्राजील के राष्ट्रपति मिचेल टेमर, दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति जैकब जुमा, जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे और कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन त्रुदो से द्विपक्षीय मुलाकात की तथा कई मुद्दों पर बातचीत की.

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