पटना में जदयू का मेला; 20 राज्यों केअध्यक्ष पहुंचे, पूरा शहर पोस्टर-बैनरों से पटा

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जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी व राष्ट्रीय परिषद की बैठक शनिवार को अलग- अलग पटना में होगी. पूरा शहर पोस्टरों से पाट दिया गया है, जगह-जगह बैनर लगे हैं. राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक दिन के 11 बजे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सरकारी आवास एक अणे मार्ग में होगी. वहीं शरद यादव के नेतृत्व में राष्ट्रीय परिषद की बैठक श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में होगी.
बिहार में भाजपा के साथ सरकार बनाने के बाद नीतीश और शरद यादव आमने-सामने आ गए हैं. बैठक में शामिल होने के लिए बिहार से बाहर के जदयू के 20 राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष शुक्रवार को ही पटना पहुंच गए हैं, तीन और राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष शनिवार की सुबह तक पहुंचेंगे. बैठक के लिए पूरा शहर पोस्टरों से पाट दिया गया है, जगह-जगह बैनर लगे हैं.
कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी के अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता महागठबंधन छोड़ने के कारणों और NDA के साथ मिलकर बिहार में सरकार बनाने के मसले पर अपनी बात रखेंगे. इसके बाद एनडीए में शामिल होने, बिहार इकाई व विधानमंडल दल के सदस्यों की ओर से NDA के साथ सरकार बनाने के सर्वसम्मत फैसले को कार्यकारिणी में पारित कराया जाएगा. रवीन्द्र भवन में खुला अधिवेशन के साथ ही बैठक समाप्त होगी.
पार्टी की ओर से राजनीतिक, आर्थिक व सामाजिक प्रस्ताव लाया जाएगा. राजनीतिक प्रस्ताव में NDA में विधिवत शामिल होने के साथ ही केंद्र की सरकार की नीतियों के समर्थन का प्रस्ताव आएगा. आर्थिक प्रस्ताव में बिहार को मिले विशेष पैकेज, बिहार को विशेष राज्य का दर्जा, कालाधन, बेनामी संपत्ति पर प्रहार आदि से संबंधित प्रस्ताव होंगे. सामाजिक में पूर्ण नशाबंदी, दहेजबंदी, बाल विवाह, पौधारोपण का प्रस्ताव होगा. बैठक में राज्य में व्याप्त बाढ़ का कहर पर भी चर्चा होगी. सरकार की ओर से किए जा रहे कार्यों व पार्टी के स्तर पर किए जाने वाले संभावित कार्यों पर मंथन होगा.
पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सह प्रधान महासचिव केसी त्यागी के अनुसार चार राज्यों हरियाणा, गुजरात, मध्यप्रदेश व राजस्थान को छोड़ पार्टी की 27 प्रदेश इकाइयों में से सभी 23 प्रदेश अध्यक्ष बैठक में शामिल होंगे। झारखंड, जम्मू-कश्मीर, उत्तरप्रदेश, आंध्रप्रदेश, तेलंगना, दादर नगर हवेली, पंजाब, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, मणिपुर, असम, दमनदीव, लक्षद्वीप, उत्तराखंड व दिल्ली आदि राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष शुक्रवार को पटना पहुंच गए.
पार्टी महासचिव पद से हटाए गए अरुण श्रीवास्तव और राज्यसभा सांसद अली अनवर ने शुक्रवार को कहा कि शरद यादव और उनके समर्थक शनिवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक का बहिष्कार कर श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में अपनी अलग बैठक करेगा.


अरुण श्रीवास्तव एवं अली अनवरने कहा कि हम सब राष्ट्रीय कार्यकारिणी में अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन नीतीश कुमार ने हमलोगों को बिना किसी नोटिस के हटा दिया. इसलिए हमने कार्यकारिणी का बहिष्कार कर पटना में उसी वक्त अपनी अलग बैठक करने का फैसला लिया है. श्रीवास्तव ने कहा कि जदयू में शरद यादव सबसे पुराने नेता हैं, संस्थापक हैं. नीतीश कुमार तो समता पार्टी के नेता थे.
हम चुनाव आयोग को यही बात बताकर चुनाव चिह्न तीर की मांग करेंगे. नीतीश कुमार को पार्टी के दस सांसदों और 71 विधायकों के अलावा केवल पांच राज्यों का समर्थन प्राप्त है. नीतीश सत्ता का दुरूपयोग कर रहे हैं, असली गुट तो शरद यादव का है.पार्टी के 14 राज्यों के अध्यक्ष हमारे साथ हैं, इनमें से छह-सात अध्यक्ष तो साझी विरासत सम्मेलन में भी शामिल हुए थे. नीतीश कुमार तानाशाह की तरह व्यवहार कर रहे हैं, उन्होंने ना सिर्फ हम दोनों को महासचिव और राज्यसभा में पार्टी के उप नेता पद से हटाया बल्कि शरद यादव को भी सदन नेता पद से हटा दिया.
नीतीश कुमार ने पिछले दिनों अमित शाह से मुलाकात के बाद कहा था कि वो (शरद यादव) अपना रास्ता चुनने के लिए स्वतंत्र हैं. पूरी पार्टी से विचार के बाद ही हमने फैसला लिया था, सबकी सहमति के बाद ही भाजपा के साथ आए और बिहार में सरकार बनाई. मैं कुछ भी करने से पहले पार्टी के लोगों से जरूर पूछता हूं.
उधर शरद यादव ने गुरुवार को दिल्ली में साझा विरासत बचाओ सम्मेलन किया था. जिसमें राहुल गांधी समेत कांग्रेस, राजद, सपा, बसपा, माकपा, भाकपा, नेशनल कांफ्रेंस सहित करीब 16 विपक्षी पाटर्यिों के नेताओं ने शिरकत की थी. शरद ने पिछले दिनों नीतीश के फैसले के खिलाफ बिहार में तीन दिन की यात्रा भी की थी. महागठबंधन छोड़कर भाजपा के साथ जाने के नीतीश कुमार के कदम से शरद यादव नाराज हो गए और इसे जनता के साथ किया गया धोखा बताया.
लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे और पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के खिलाफ CBI द्वारा केस दर्ज किए जाने के बाद नीतीश कुमार ने उन्हें जनता के बीच जाकर फैक्ट्स के साथ सफाई देने को कहा था और जदयू के लोग नीतीश के जीरो टॉलरेंस का हवाला देकर तेजस्वी से इस्तीफा देने की मांग कर रहे थे. तेजस्वी ने ना तो सफाई दी और ना ही इस्तीफा दिया. इसके बाद मुख्यमंत्री ने 26 जुलाई को इस्तीफा दे दिया और दूसरे ही दिन भाजपा के साथ मिलकर सरकार बना ली.
जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि शरद यादव की उम्र हो गयी है और उन्हें अब सक्रिय राजनीति से सन्यास ले लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि शरद जदयू को सरकारी पार्टी और अपने गुट को असली बताते हैं, यह उनका वहम है. उनके साथ पार्टी का एक कार्यकर्ता तक नहीं है.

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