आज तक फेल नहीं हुयी इस बुजुर्ग द्वारा की गयी भूकम्प की भविष्यवाणी

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विज्ञान के हिसाब से आज तक भूकंप की भविष्यवाणी कभी संभव नहीं है और कई वैज्ञानिक भी इस तरह से मानते हैं लेकिन बनारस के काशी में एक ऐसे बुजुर्ग हैं जो भूकंप की भविष्यवाणी करते हैं और उनकी भविष्यवाणियां आज तक बिल्कुल सटीक होती हैं.
बादलों की चाल से और आसमान का रंग देखकर करते हैं भविष्वाणी
बुजुर्ग की उम्र 57 साल को पार कर गई है और यह भूकंप बाढ़ और प्राकृतिक आने वाली आपदाओं की भविष्यवाणी किया करते हैं इनकी भविष्यवाणी करने का साधन बादल होते हैं यह बादलों की चाल देखकर भविष्यवाणी करते हैं पिछले साल जब नेपाल में भूकंप आया था तो इन्होंने बादलों को देख कर ही भविष्यवाणी की थी.
जो भी सच साबित हुई इसके अलावा चीन जापान और भुज के भूकंप की भविष्यवाणी भी इन्होंने समय से पूर्ण कर दी थी जो कि सच ही साबित हुई.
इस बुजुर्ग का नाम है मोहम्मद शकील और यह काशी के मुस्लिम बहुल इलाके छित्तनपुरा में रहते हैं शकील अहमद लगभग पिछले 25 सालों से भविष्यवाणी करते हुए आ रहे हैं. इनकी भविष्यवाणियों का कोई वैज्ञानिक आधार तो नहीं है लेकिन ज्यादातर इन की भविष्यवाणियां सही और बिल्कुल सटीक साबित होती है.
शकील अहमद ने 2005 में जम्मू कश्मीर में आया भूकंप और गुजरात के भुज में आया भूकंप की भविष्यवाणी की थी. इसके अलावा जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में जब बाढ़ से भयंकर तबाही हुई थी उस दौरान भी इन्होंने समय से पूर्व ही भविष्यवाणी कर दी थी.
इस आधार पर करते हैं बुजुर्ग शकील अहमद भविष्यवाणी
शकील अहमद का भविष्यवाणी करने का तरीका भी अजीब है और वह इस आधार पर भविष्यवाणी करते हैं आसमान में चलने वाले कुछ खास किस्म के बादल होते हैं जिनकी शकील अहमद को अच्छी तरह से पहचान है और वह बताते हैं जमीन के अंदर जो भी हलचल होती है.
तब उसका सीधा प्रभाव बादलों में अवश्य बनता है और जमीन के अंदर की होने वाली हलचल और इससे निकलने वाली तरंगे बादलों को कंट्रोल करती है.
जमीन से आसमान तक जो रोशनी की किरणें जाती हैं उनके रंग और बादलों की चाल को देख कर यह भूकंप का अनुमान लगाते हैं शकील अहमद का दावा है कि बादलों को देखकर न सिर्फ भूकंप की समय से पहले भविष्यवाणी की जा सकती है बल्कि उसका स्थान और भूकंप कितने रिएक्टर स्केल पैमाने पर आएगा इसकी भी पहले से भविष्वाणी की जा सकती है और उन्होंने ज्यादातर ऐसा करके भी दिखाया है.
इन बुज़ुर्ग की प्रेडिक्शन को United States Geographic Survey यूनाइटेड स्टेट्स ज्योग्राफिकल सर्वे (USGS) ज़रूर मानती है। शकील अहमद जब कोई प्रेडिक्शन करते हैं, तो वे इसकी जानकारी मेल के ज़रिये United States Geographic Survey को देने के साथ साथ अपने देश के सभी मौसम कार्यालयों, इसरो, नासा को भी देते हैं.

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