अवैध बूचड़खाना संचालकों पर होगी कार्रवाई : पारस

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पशु व मत्स्य संसाधन मंत्री पशुपति कुमार पारस ने कहा कि बिहार राज्य में अवैध रूप से चलाए जा रहे बूचड़खाना संचालकों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बिहार में 1956 में ही कानून बना कर राज्य में गौ हत्या पर प्रतिबंध लगायी गई है। कानून के अनुसार 15 साल से अधिक उम्र के बैल, भैंस आदि पशु जो काम लायक नहीं हैं, उन्हें जांच के बाद बधशाला भेजा जा सकता है।
सूचना भवन में आयोजित विभागीय प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि बूचड़खाना का लाइसेंस नगर विकास विभाग के माध्यम से मिलता है। इसलिए पशु व मत्स्य संसाधन विभाग और नगर विकास विभाग मिल कर अवैध बूचड़खाना पर कार्रवाई करेगा। छापामारी की जाएगी, मुकदमा भी होगा। पिछले दिनों भोजपुर में मांस लदा ट्रक पकड़ा गया था। मांस जांच के लिए भेजा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि मांस किसका है? पशुपालन विभाग ने पूरे राज्य में चल रहे अवैध बूचड़खानों की संख्या का पता लगाने के लिए एक टीम गठित की है। जिसके बाद इन सभी अवैध बूचड़खानों को बंद किया जाएगा। अभी सरकार के पास आंकड़े नहीं हैं कि राज्य में कितने अवैध बूचड़खाने काम कर रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक बिहार में सिर्फ 2 बूचड़खाने ही ऐसे हैं जो कानून के मुताबिक चल रहे हैं। जिनमें एक अररिया जिले में और दूसरा फारबिसगंज में है। इनको सरकार की ओर से लाइसेंस दिया गया है। माना जा रहा है कि बिहार करीब 140 बूचड़खानों पर जल्द ही ताला लटक सकता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में सबसे ज्यादा बूचड़खाने सीमांचल क्षेत्र में हैं, जिसमें कासगंज और पुरनिया भी आते हैं। अकेले पटना जिले में ही दर्जन भर से ज्यादा अवैध बूचड़खाने हैं। बूचड़खानों के लिए लाइसेंस स्थानीय नगर निगम जारी करती है। पूर्व पशुपालन मंत्री अवधेश कुमार सिंह ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों से अवैध बूचड़खानों को लेकर मार्च में ही रिपोर्ट मांगी थी।


विभागीय सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने कहा कि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के अंतर्गत जिला स्तर पर DM की अध्यक्षता में समिति बनाने के लिए कहा गया है। सभी जिलों को 50-50 लाख की राशि दी गई है, जिससे लावारिस पशुओं की देखभाल की जा सकती है। DM के अनुरोध पर पटना में श्रीकृष्ण गोशाला में आधारभूत संरचना के लिए 50 लाख रुपए अलग से दिया गया है।
प्रेसवार्ता में विभागीय मंत्री पशुपति कुमार पारस, सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी, कम्फेड की प्रबंध निदेशक सीमा त्रिपाठी, निदेशक गव्य विकास एके झा तथा मत्स्य निदेशक निशात अहमद भी उपस्थित थे। पशु चिकित्सा के लिए सरकार जल्द ही दो हाइड्रोलिक वैन खरीदने जा रही है ताकि बड़े जानवरों को आसानी से चिकित्सालय तक पहुंचाया जा सके।
कम्फेड ने महिला सहकारी समितियों के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धी हासिल करते हुए 16-17 में 538 महिला समितियों का गठन किया, फलस्वरूप वर्षांत तक 2.01 लाख महिला सदस्य हो गयींl दूध संग्रहण जंहा 16- 17 में जुलाई 16 तक औसत संग्रह 15.97 लाख किलो प्रतिदिन था, वो 17- 18 की समान अवधि में 16.06 लाख किलो प्रतिदिन हो गया हैl पैकेटबंद दूध विपणन में भी 16- 17 में 10.41 प्रतिशत वृद्धि हुयी, फलस्वरूप 15-16 में 12.18 लाख लीटर प्रतिदिन के स्थान पर 16-17 में 13.45 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया हैl
मत्स्य क्षेत्र में विभाग बहुत जल्द आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर हैl बिहार में 6.42 लाख टन मछली की डिमाण्ड के विरुद्ध 5.10 लाख टन मछली का उत्पादन करता हैl इस क्षेत्र में तेज़ी से विकास के लिए अब नई तकनीक का प्रयोग कर वर्ष में दो बार उत्पादन लेने की योजना पर कार्य प्रारम्भ हो गया हैl पटना में थोक मछली बाज़ार के निर्माण की स्वीकृति भी राष्ट्रीय कृषि विकास योजनान्तर्गत मिल चुकी हैl

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