आरएसएस के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने रविवार को कहा कि अयोध्या में राम मंदिर बनना तय है. वहां दूसरा कुछ नहीं बन सकता, लेकिन प्रक्रिया से जाना होगा. उन्होंने कहा कि कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू होगा. उन्होंने कहा कि राम मंदिर पर आम सहमति बनाना आसान नहीं है. हालांकि जो प्रयास हो रहा है उसका हम स्वागत करते हैं. नागपुर में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की मीटिंग से इतर उन्होंने यह बयान दिया.
शनिवार को ही भैयाजी जोशी को नागपुर की बैठक में चौथी बार सर्वसम्मति से सरकार्यवाह चुना गया था. बैठक से पहले चर्चाएं थीं कि जोशी के स्थान पर संघ के सहसरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है, लेकिन सभी कयासों पर उस वक्त लगाम लग गया जब आरएसएस की नागपुर में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में तीन हजार प्रचारकों के बीच सुरेश भैयाजी को एक बार फिर सरकार्यवाह चुन लिया गया.
अब भैयाजी मार्च 2021 तक इस पद पर रहेंगे. सरकार्यवाह के तौर पर उनकी भूमिका संगठन में सलाहकार की होगी. सरकार्यवाह को महासचिव भी कहा जाता है. सरकार्यवाहक के तौर पर भैयाजी का ये चौथा कार्यकाल है.
इससे पहले एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मांग की थी कि सुप्रीम कोर्ट बाबरी मस्जिद- राम जन्मभूमि विवाद पर अपना फैसला 2019 के लोकसभा चुनावों के संपन्न होने तक टाल दे, क्योंकि इस मुद्दे का ‘ भारी राजनीतिकरण’ होगा. ओवैसी ने कहा था कि जमीन के मुद्दे पर अयोध्या विवाद का धार्मिक आस्था से कोई लेना- देना नहीं है.
ओवैसी ने कहा कि राम मंदिर का मुद्दा जमीन के मालिकाना हक का मामला है. इसका आस्था से कोई लेना- देना नहीं है. यह न्याय एवं धर्मनिरपेक्षता के शासन से जुड़ा है. हर एक को उच्चतम न्यायालय का फैसला स्वीकार करना होगा. बहरहाल, संसदीय चुनावों से पहले इस मुद्दे पर फैसला नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे भारी राजनीतिकरण हो जाएगा.’
उन्होंने कहा कि मुझे 100 फीसदी यकीन है कि 2019 के चुनावों से पहले फैसला आ जाएगा, क्योंकि बीजेपी ऐसा ही चाहती है. भगवान राम इस देश का जीवन हैं. लेकिन आस्था और भावनाएं अदालत में नहीं चलतीं. बीजेपी को राम मंदिर की चिंता नहीं करनी चाहिए. इसे निर्मोही अखाड़ा (यह जमीन के मालिकाना हक विवाद में एक पक्ष है) पर छोड़ देना चाहिए.

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