अयोध्या मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ वाली पांच जजों की संविधान पीठ करेगी. पीठ की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई करेंगे.
दस जनवरी को मामले की सुनवाई होगी. इस पीठ की सबसे बड़ी खासियत है कि इसकी अध्यक्षता स्वयं मुख्य न्यायाधीश कर रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट का वरिष्ठता क्रम देखा जाए तो बाकी के चार न्यायाधीश भी भविष्य में मुख्य न्यायाधीश बनने वाले हैं. यानी पीठ के गठन में वरिष्ठता का भी पूरा ख्याल रखा गया है. इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सर्कुलर जारी कर दिया गया है.
नवगठित संविधान पीठ अभूतपूर्व बेंच मानी जाएगी. ये चीफ जस्टिस रंजन गोगोई का अप्रत्याशित कदम है. उनका पांच जजों की संविधान पीठ का प्रशासनिक आदेश तीन जजों के 27 सितंबर 2018 वाले न्यायिक आदेश के विपरीत है, जिसमें मामले को पांच जजों को भेजने से इनकार कर दिया गया था. दस जनवरी को यह तय हो सकता है कि अयोध्या मामले की सुनवाई किस तारीख से शुरू होगी. उसी दिन यह भी तय होगा कि इस मामले की रोजाना सुनवाई होगी या नहीं? आम तौर पर संविधान पीठ किसी मुद्दे पर बैठती है तो वह उसी मामले की सुनवाई करती है. ऐसी सुनवाई मंगलवार, बुधवार और शुक्रवार को होती रही है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को दिये गए फैसले में राम जन्मभूमि को रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के बीच तीन बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था. इस फैसले को सभी पक्षकारों ने 13 अपीलों के जरिये सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और तब से यह मामला लंबित है. अभी तक इसकी मेरिट पर सुनवाई का नंबर नहीं आया है. चार जनवरी 2019 को पिछली सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ ने मामले को उचित पीठ के समक्ष 10 जनवरी को सुनवाई पर लगाने का आदेश दिया था.
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से जारी नोटिस में पीठ गठन की जानकारी दी. मामले की सुनवाई में हो रही देरी के कारण संत समाज और संघ परिवार लगातार सरकार पर अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाने का दबाव बना रहा था जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही मे दिये एक साक्षात्कार में कोर्ट में मामला लंबित रहने तक अध्यादेश की संभावना से इन्कार किया था. मुख्य न्यायाधीश मास्टर आफ रोस्टर होते हैं, पीठ गठन उन्हीं के प्रशासनिक कार्य क्षेत्र में आता है.


मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने इस मामले की सुनवाई पीठ का गठन करने में काफी सावधानी बरती है. सबसे पहले तो इस अहम मुकदमें को पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ में सुनवाई के लिए लगाया जबकि इससे पूर्व सुनवाई करने वाली पीठ ने मुकदमें को संविधान पीठ को भेजने की मांग ठुकरा दी थी. दूसरी खासियत पीठ में शामिल न्यायाधीशों की वरिष्ठता भी है. पीठ में स्वयं मुख्य न्यायाधीश शामिल हैं और भविष्य में मुख्य न्यायाधीश बनने वाले न्यायाधीश हैं. जस्टिस एके सीकरी को छोड़ दिया जाए तो पीठ में शामिल तीन न्यायाधीश वरिष्ठतम न्यायाधीश हैं. जस्टिस सीकरी दो माह बाद ही छह मार्च को सेवानिवृत हो रहे हैं.
पिछले वर्ष जनवरी में चार न्यायाधीशों द्वारा मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ की गई प्रेस कान्फ्रेंस में जस्टिस गोगोई शामिल थे. उस प्रेस कान्फ्रेंस मे महत्वपूर्ण मुकदमों की सुनवाई की पीठ गठन का भी मुद्दा उठा था. हालांकि राम जन्मभूमि मामले का मुद्दा उसमें शामिल नहीं था, लेकिन गाहे बगाहे महत्वपूर्ण मुकदमों की सुनवाई के लिए वरिष्ठतम न्यायाधीशों की सुनवाई पीठ गठित करने की मांग उठती रहती है. वैसे सुप्रीम कोर्ट का हर न्यायाधीश बराबर अहमियत रखता है उसके फैसले की भी समान अहमियत होती है.
नयी पीठ में इस मामले की सुनवाई की तैयारी के आदेश में शामिल रही पीठ के पुराने न्यायाधीश शामिल नहीं हैं. पहले इस मुकदमें की सुनवाई तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की पीठ कर रही थी. इसी पीठ ने अयोध्या भूमि अधिग्रहण कानून को सही ठहराने वाले इस्माइल फारुखी फैसले के उस अंश को दोबारा विचार के लिए संविधानपीठ को भेजने की मांग ठुकरा दी थी, जिसमें मस्जिद को नमाज के लिए इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं माना गया है.
इस पीठ के गठन को देखकर लगता है कि इस मुकदमें का फैसला जल्दी ही आएगा. इसका कारण मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की कार्यशैली और उनका कार्यकाल है. जस्टिस गोगोई की कार्यशैली बहस के दौरान कानूनी मुद्दों पर कायम रहने और मामला जल्दी निपटाने की है. साथ ही जस्टिस गोगोई इसी वर्ष 17 नवंबर को सेवानिवृत हो जाएंगे, ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि वह इसके पूर्व मुकदमे की सुनवाई पूरी कर लेंगे, जिससे जल्दी फैसले की उम्मीद जगती है.



loading…

Loading…






Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *