वार्षिक अमरनाथ यात्रा कई सालों से कश्मीर के टूरिज्म के लिए रीड़ की हड्डी के समान साबित हो रही है लेकिन इस सच्चाई के बावजूद न सिर्फ अलगाववादी गुट बल्कि प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड भी इसमें रोड़ा अटका रहा है।

पिछले साल कश्मीर में आने वाले कुल 15 लाख टूरिस्टों में पौने चार लाख का आंकड़ा अमरनाथ यात्रियों का था। अमरनाथ यात्रियों की संख्या कश्मीर आने वालों के बीच शामिल करने की प्रक्रिया करीब 10 साल पहले उस समय शुरू हो गई थी जब राज्य सरकार ने विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने की खातिर इन आंकड़ों को विश्व समुदाय के समक्ष पेश किया था।

 

इन आंकड़ों के मुताबिकवर्ष 2004 से लेकर वर्ष 2009 तक कश्मीर आए 51 लाख टूरिस्टों में 21.38 लाख अर्थात आधे से कुछ कम अमरनाथ यात्री थे जो श्रद्धालु होने के साथ-साथ पर्यटक बन कर भी कश्मीर में घूमे थे।

 

अलगाववादियों के बाद अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड तथा प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड आमने-सामने हैं। कारण हर बार अमरनाथ यात्रियों द्वारा यात्रा मार्ग पर छोड़े जाने वाला हजारों टन कूड़ा करकट है तो राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के मुताबिक, अमरनाथ यात्रा में बढ़ती संख्या के कारण पहाड़ों का इको सिस्टम तबाह हो रहा है। साथ ही उसका कहना था कि लम्बी अवधि तक इसको चलाए रखने से पहाड़ पर प्रदूषण बढ़ रहा है।

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