अब नाजुक दौर में महागठबंधन का तनाव

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बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के मुद्दे पर महागठबंधन के घटक दलों का रिश्ता नाजुक दौर से गुजर रहा है। हालांकि कांग्रेस की ओर से राजनीतिक गतिरोध तोडऩे की कोशिश जारी है। उधर राजद-जदयू के शांतिदूत के रूप में जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव एवं राजद के पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी ने भी पहल की है।
हाँलाकि अभी तक कोशिशें कामयाब होती नहीं दिख रही हैं। सुलह के रास्ते अब बंद नजर आ रहे हैं,
हालात बता रहे हैं कि राष्ट्रपति चुनाव के बाद ही राजनीतिक अनिश्चितताओं से पर्दा उठ सकेगा। राष्ट्रपति चुनाव की तैयारियों के बहाने रविवार को सभी पार्टियों ने अपने-अपने विधायकों के साथ महागठबंधन के बिगड़ते रिश्ते की समीक्षा की, साथ ही राजनीतिक कयासों एवं संभावनाओं की पड़ताल की।
हाँलाकि सामान्य तौर पर सुबह से ही शुरू हो जाने वाले राजद-जदयू के नेता और प्रवक्ता रविवार को बोलने से बचते रहे। महागठबंधन में मध्यस्थ की भूमिका में खड़ी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी की नीतीश कुमार एवं लालू प्रसाद से अलग-अलग बातचीत का सिलसिला तो तीन दिनों से जारी है। रविवार को उन्होंने शरद यादव से भी फोन पर बात की।


पशुपालन मंत्री अवधेश सिंह ने भी लालू प्रसाद पर सुलह-समझौते के लिए दबाव बनाया और महागठबंधन के लिए दोनों से ‘कुर्बानी’ मांगी। इसके एक दिन पहले दिल्ली में शरद यादव ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी बात की थी। शरद यादव के रिश्ते लालू प्रसाद से भी बेहतर हैं, किंतु तमाम प्रयासों के बावजूद गतिरोध बरकरार है।
समाजवादी नेता शिवानंद तिवारी ने नम्र होते हुए नीतीश कुमार से महागठबंधन को बचाने का आग्रह किया। लालू के बेहद करीबी माने जा रहे शिवानंद ने कहा कि कभी संघमुक्त भारत की बात करने वाले नीतीश कुमार से “मैं हाथ जोड़कर निवेदन करता हूं कि वे लालू प्रसाद से बात करें और बिहार को भाजपा के कब्जे में आने से रोकें। वर्तमान स्थिति से निपटने में सिर्फ नीतीश ही सक्षम हैं।“ शिवानंद के इस बयान को राजद के स्टैंड से जोड़कर देखा जा रहा है।
उधर जदयू प्रवक्ता संजय सिंह ने राजद की चुप्पी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि लालू प्रसाद ने अपना दरवाजा बंद कर रखा है, जबकि जदयू की खिड़कियां अभी भी खुली हैं।
उधर लालू यादव अपने पुराने स्टैंड के अनुसार जब वह मुख्यमंत्री थे, तो समूचा विपक्ष चारा घोटाले के आरोप में उनसे इस्तीफे की मांग कर रहा था, लेकिन लालू ने 1997 में कोर्ट द्वारा उनकी गिरफ्तारी का आदेश जारी किए जाने के बाद इस्तीफा दिया था और मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने पर अपनी पत्नी राबड़ी देवी को सत्ता सौंप दी थीl दो दशक बाद आज उनकी पार्टी लगभग उसी स्थिति से गुजर रही है लेकिन इस बार सरकार गठबंधन की हैl
रेल होटल घोटाला के सिलसिले में बीते दिनों सीबीआइ ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस सिलसिले में सीबीआइ ने लालू प्रसाद, उनकी पत्‍नी राबड़ी देवी तथा पुत्र तेजस्‍वी यादव सहित कइयों के खिलाफ FIR दर्ज की। घोटाला का आरोप लगने के बाद मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार पर तेजस्‍वी को मंत्रिमंडल से हटाने का दबाव है।
मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने स्‍पष्‍ट कर दिया है कि जदयू भ्रष्‍टाचार व अपराध पर जीरो टॉलरेंस की अपनी नीति पर कायम रहेगा। उन्‍होंने यह भी कहा कि ‘जिनपर आरोप लगा है, उन्‍हें अपनी बेगुनाही का प्रमाण देना चाहिए।“ इसके लिए जदयू ने तेजस्‍वी को चार दिनों का वक्‍त दिया था, जो पूरा हो चुका है। उधर राजद और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने समय बीतने के पहले ही स्‍पष्‍ट कर दिया था कि तेजस्‍वी यादव इस्‍तीफा नहीं देंगे।
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