देश की राजधानी दिल्ली से बेहद करीब ग्रेटर नोएडा (यूपी) में बनने वाले जेवर एयरपोर्ट की सभी बाधाएं लगभग दूर हो चुकी हैं. जेवर एयरपोर्ट के निर्माण के बाद यह विश्व का चौथा सबसे बड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट होगा. खास बात यह है कि इस एयरपोर्ट को भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का नाम मिल सकता है. ऐसी चर्चा है कि पार्टी की आला कमान भी इस पक्ष में है. यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल 25 दिसंबर को जेवर एयरपोर्ट का शिलान्यास कर सकते हैं.
सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस एयरपोर्ट का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर कर सकती है. दरअसल, 25 दिसंबर को ही अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मदिन भी है. इसलिए इसी दिन को एयरपोर्ट के शिलान्यास के तौर पर चुना गया है. हालांकि, अभी नाम को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है.


स्थानीय सूत्रों का कहना है कि एयरपोर्ट की प्रस्तावित जगह के आसपास पिछले कुछ दिनों से गतिविधियां तेज हो गई हैं, ऐसे में इस संभावना को बल मिलता है कि जल्द ही एयरपोर्ट के शिलान्यास की तैयारी है. हिंदी अखबार दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गौतम बुद्ध नगर के सांसद महेश शर्मा ने कहा है, ‘मुझे विश्वास है कि दिसंबर के अंतिम सप्ताह या जनवरी के पहले सप्ताह में जेवर एयरपोर्ट का शिलान्यास हो जाएगा. इसके लिए प्रधानमंत्री से बात हुई है. हम चाहेंगे कि जेवर एयरपोर्ट का शिलान्यास प्रधानमंत्री जी के हाथों हो.’
जेवर एयरपोर्ट भारत का सबसे बड़ा और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा हवाई अड्डा होगा. ये एयरपोर्ट दिल्ली एयरपोर्ट के मुकाबले दोगुना होगा और यहां सभी आधुनिक सुविधाएं होंगी. पूर्व एविएशन मंत्री अशोक गणपति राजू के हवाले से पीटीआई की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि एयरपोर्ट की क्षमता सालाना 3.5 करोड़ यात्रियों की होगी.
इस एयरपोर्ट से पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सर्वाधिक लाभ होगा. यहां एयर कार्गो हब भी बनाया जाएगा. नागरिक उड्डयन मंत्री जयंत सिन्हा ने पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स के एक कार्यक्रम में कहा कि जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने के साथ उत्तर प्रदेश का पश्चिमी बेल्ट आर्थिक गतिविधियों, हवाई यात्रियों और माल ढुलाई के लिए केंद्र बन जाएगा. उन्होंने कहा कि इस एयरपोर्ट से माल ढुलाई पर खासतौर से जोर दिया जाएगा, इससे कृषि को भी लाभ होगा.
जमीन अधिग्रहण की समस्याओं के चलते जेवर एयरपोर्ट पर काम लंबे समय से अटका था, हालांकि सरकार का कहना है कि इन बाधाओं को दूर कर लिया गया है. केंद्र सरकार ने मई 2018 में जेवर एयरपोर्ट को सैद्धान्तिक मंजूरी दी थी. इस एयरपोर्ट के लिए 3000 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता है, जबकि पहले चरण में एक हजार हेक्टेयर जमीन की जरूरत है.

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